
मुख्यमंत्री आर्यन निराश होकर गांधीवादी जगपति से मिलने पहुंचा, प्रोफेसर सुरेंद्र भी बुलाये गए.
जाने को मजबूर हैं. ऐसा भी नहीं है कि इस संयुक्त परिवार की हालत उसे पता नहीं थी, लेकिन उसने अच्छी नौकरी मिलते ही अपने भाइयों से किनारा कर लिया था. आर्यन के सामने उसके बचपन के सपने घूमने लगे, जब उसकी माँ उसके भाइयों के हिस्से का दूध भी उसे दे देती थी और कहती थी- मेरा आर्यन पढ़ने में सबसे तेज है, यह बड़ा होकर अफसर बनेगा और अपने सारे भाइयों को आगे बढ़ाएगा. उसके दोनों छोटे भाई भी हंस कर उस से चिपट जाते थे.Our website uses cookies to improve your experience. Learn more
حسنًا